रोजगार और खाने की आजादी पर हमला बर्दाश्त नही,नगर निगम को सौंपा ज्ञापन

वाराणसी, 7 जुलाई 2026 – नगर निगम वाराणसी द्वारा शहर में मीट-मांस-मछली बेचने पर रोक के मुद्दे पर आज मीट-मछली व्यवसायियों ने विपक्षी पार्षदों के नेतृत्व में कांग्रेस, आप, एपवा और सामाजिक/व्यवसायिक संगठनों के साथ नगर आयुक्त श्री हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर वार्ता की और ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने क्या कहा:प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को गरीबों की आजीविका, संविधान प्रदत्त अधिकारों तथा वाराणसी की साझा सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुछ अवांछनीय तत्व शहर की हालात को बिगाड़ना भी चाहते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नगर निगम का तर्क पूरी तरह विरोधाभासी है। “यदि लाइसेंसधारी दुकानों से धार्मिक नगरी और पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं है, तो बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं से ही परेशानी होने का दावा कैसे किया जा सकता है? सच्चाई यह है कि वर्षों से लाइसेंस जारी करना और उनका नवीनीकरण करना स्वयं नगर निगम की जिम्मेदारी रही है। प्रशासनिक विफलता की सजा गरीब मेहनतकश लोगों को नहीं दी जा सकती।”हजारों परिवारों के रोजी-रोटी का सवाल: प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी मछली और मांस व्यापार से जुड़ी है। इनमें मल्लाह, निषाद, बंगाली, मुस्लिम तथा अन्य मेहनतकश समुदाय शामिल हैं। धार्मिक भावनाओं के नाम पर इन समुदायों को शहर से बाहर धकेलने की कोशिश सामाजिक अन्याय और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्षद दल ने स्पष्ट कहा कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को वैध व्यवसाय करने, अपनी पसंद का भोजन करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। किसी भी सरकार या प्रशासन को यह अधिकार नहीं है कि वह गरीबों की आजीविका को बलि का बकरा बनाकर दिखावटी सांस्कृतिक राजनीति करे। प्रमुख मांगे: मछली, मीट एवं मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर करने का प्रस्ताव त्काल वापस लिया जाए। सभी पात्र विक्रेताओं का विशेष अभियान चलाकर पंजीकरण एवं लाइसेंस जारी किया जाए। किसी भी गरीब परिवार की रोजी-रोटी पर बुलडोजर चलाने की कोशिश बंद की जाए।प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “वाराणसी किसी एक खान-पान, एक संस्कृति या एक समुदाय का शहर नहीं, बल्कि विविधताओं और सह-अस्तित्व की नगरी है। गरीबों के रोजगार और नागरिकों की खाने की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नगर निगम ने अपने भेदभावपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा और शहर का मेहनतकश समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।” नगर आयुक्त का बयान:प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान नगर आयुक्त श्री हिमांशु नागपाल ने कहा – “हम मीट, मुर्गा, मछली के किसी भी वैध तरीके से व्यापार करने वाले व्यापारी के खिलाफ नहीं हैं।” ज्ञापन देने वालों में सुमित सोनकर, राघवेंद्र चौबे, संजीव सिंह, अब्दुला खान, कुसुम वर्मा, धनंजय त्रिपाठी, गुलशन अली, मनीष शर्मा, रोजा मैथ्यूज, रमज़ान अली, सनी सोनकर, ओकास अंसारी, प्रदीप राजभर, तुफैल अंसारी आदि।प्रेषक-धनंजय त्रिपाठी,साझा संस्कृति मंच +91 73768 48410








