निबंधन कार्यालयों के निजीकरण के विरोध में वकीलों की कलमबंद हड़ताल,SDM को सौंपा ज्ञापन

सेवराई (गाजीपुर) – निबंधन कार्यालयों के निजीकरण और ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को सेवराई तहसील में अधिवक्ताओं, वसीकानवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं ने पूर्ण कलमबंद हड़ताल की। बार एसोसिएशन सेवराई एवं स्टाम्प यूनियन के बैनर तले हुए इस विरोध के कारण तहसील परिसर की सभी स्टाम्प विक्रेता और फोटोस्टेट की दुकानें भी बंद रहीं। निबंधन एवं संबंधित कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। लाखों की आजीविका पर संकट :बार एसोसिएशन सभागार में हुई संयुक्त बैठक में वक्ताओं ने कहा कि निबंधन कार्यालयों का निजीकरण न्यायिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है। इससे अधिवक्ता, वसीकानवीस, स्टाम्प विक्रेता समेत लाखों लोगों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। SDM को सौंपा 5 सूत्रीय ज्ञापन: बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन उपजिलाधिकारी संजय यादव को सौंपा। मुख्य मांग: 1-निबंधन कार्यालयों के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त हो 2- जनपद-तहसील स्तर पर ई-लाइब्रेरी की स्थापना और सभी तहसील न्यायालयों में CCTV लगे। 3- वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू हो, नवोदित अधिवक्ताओं को 5 हजार मासिक भत्ता मिले। 4-अधिवक्ता, वसीकानवीस और स्टाम्प विक्रेताओं को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिले। 5- अधिवक्ता कल्याण के लिए भवन निर्माण व पर्याप्त बजट दिया जाए। धारा – 34 के आदेशों पर भी जताई नाराजगी: बैठक में धारा-34 के नामांतरण मामलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार द्वारा विधिक प्रक्रिया पूरी किए बिना आदेश पारित करने पर भी नाराजगी जताई गई। इसे न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए पारदर्शिता की मांग की गई। मांग न मानी तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन:अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ और निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर व्यापक किया जाएगा।इस अवसर पर बार एसोसिएशन अध्यक्ष पारस राम, महासचिव सुमंत सिंह कुशवाहा, एडवोकेट अयाज अहमद खान, अमरनाथ राम, हैदर अली खान, बृजेश यादव, मोहनलाल चौधरी, जितेंद्र राम, अंगद कुशवाहा, पूनम यादव, मृत्युंजय सिंह, जितेंद्र उपाध्यक्ष, संजीव सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, वसीकानवीस एवं स्टाम्प विक्रेता मौजूद रहे।








