ग़ाज़ीपुर

मुख्तार अंसारी की जब्त जमीन पर मालिकाना हक़ किसका, LDA का या सिंचाई विभाग का

लखनऊ – राजधानी की बहुचर्चित सरदार पटेल आवासीय योजना बड़े विवाद में फंस गई है। जिन फ्लैटों की चाबियां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लाभार्थियों को सौंपी थीं, अब उन्हीं फ्लैटों को सिंचाई विभाग ने ‘अवैध निर्माण’ बताकर नोटिस चस्पा कर दिया है। विभाग ने 72 आवंटियों को सात दिन में कब्जा हटाने की चेतावनी दी है। मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे की जमीन पर बना था प्रोजेक्ट:यह वही जमीन है जिसे सरकार ने माफिया पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी से कब्जामुक्त कराकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आवास योजना के रूप में विकसित किया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने यहां 2,314 वर्ग मीटर में 72 फ्लैट बनाए थे। सिंचाई विभाग का दावा: जमीन हमारी:सिंचाई विभाग ने योजना के अंतिम छोर पर बने फ्लैटों पर नोटिस चस्पा कर दावा किया कि यह भूमि विभाग की संपत्ति है। यहां बिना वैधानिक अनुमति निर्माण कराया गया है। नोटिस में कहा गया है कि सात दिन में कब्जा नहीं हटाया तो नियमानुसार कार्रवाई होगी और किसी भी नुकसान के जिम्मेदार आवंटी खुद होंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण बनाम सिंचाई विभाग, आमने-सामने: LDA का दावा है कि उसने सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर प्रोजेक्ट विकसित किया। वहीं सिंचाई विभाग जमीन पर अपना स्वामित्व जता रहा है। दो सरकारी विभागों के इस टकराव ने 72 परिवारों की मुश्किल बढ़ा दी है। 10.70 लाख में मिला था सपनों का घर: सरदार पटेल आवासीय योजना बेहद लोकप्रिय रही थी। मात्र 72 फ्लैटों के लिए करीब 8 हजार आवेदन आए थे। नवंबर 2025 में लॉटरी से 72 लाभार्थी चुने गए थे। CM योगी ने खुद चाबियां सौंपी थीं। प्रत्येक फ्लैट की कीमत 10.70 लाख रुपये थी। हजरतगंज, सिकंदरबाग और डालीबाग के पास होने से मांग ज्यादा थी। आवंटियों में दहशत, गलती किसकी ? फ्लैट मालिकों का कहना है कि उन्होंने सरकारी प्रक्रिया से आवेदन किया, लॉटरी में जीते और LDA से आवंटन लिया। भूमि विवाद की कीमत आम लोगों से क्यों वसूली जा रही है? आवंटियों ने मांग की कि विवाद का समाधान विभाग खुद करें। उठे बड़े सवाल: सबसे बड़ा सवाल: अगर जमीन सिंचाई विभाग की थी तो निर्माण शुरू होने से पहले आपत्ति क्यों नहीं की गई? अगर LDA के पास वैध अधिकार थे तो अब नोटिस क्यों? यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और सैकड़ों लोगों की उम्मीदों से जुड़ा है।फिलहाल सरकार, LDA और सिंचाई विभाग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। जल्द समाधान नहीं निकला तो यह प्रदेश की सबसे चर्चित आवासीय योजना के लिए बड़ा संकट बन सकता है।