ग़ाज़ीपुर

100 करोड़ का सवाल: हीरो कौन, विदूषक कौन ? सिनेमा, क्रिकेट, राजनीति के ग्लैमर पर उठे सवाल, युवा पीढ़ी के आदर्श बदले

नई दिल्ली – एक फिल्म के 50 या 100 करोड़ रुपये… आखिर फिल्म अभिनेता-अभिनेत्रियां ऐसा कौन सा काम करते हैं? यह सवाल आज हर उस भारतीय के मन में है जो देख रहा है कि देश में शीर्ष वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर सालाना 10-20 लाख कमाते हैं, राष्ट्रपति का वेतन भी साल में 1 करोड़ से कम है, वहीं फिल्म कलाकार सालाना 10 से 100 करोड़ कमा रहे हैं। टापर इंजीनियर भी फिल्मों की ओर क्यों ? कुछ दिन पहले एक अभिनेता की मृत्यु के बाद यह बहस तेज हुई थी कि इंजीनियरिंग में टॉप करने वाले लड़के-लड़कियां आगे पढ़ाई छोड़ फिल्म उद्योग क्यों चुन रहे हैं? बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को 100 करोड़ कमाने में पूरा जीवन लग जाता है और ये लोग एक साल में कमा लेते हैं। सवाल तो उठेगा ही: देश के विकास में इनका योगदान क्या है? तीन क्षेत्र,हद से परे कमाई : आज नई पीढ़ी सबसे ज्यादा तीन क्षेत्रों से आकर्षित है— सिनेमा, क्रिकेट और राजनीति। इनसे जुड़े लोगों की कमाई और प्रतिष्ठा दोनों सीमाओं से परे चली गई हैं। यही आधुनिक युवाओं के आदर्श बन गए हैं। मगर अब इनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।जब कोई चीज अत्यधिक महंगी, अविश्वसनीय और अप्रासंगिक हो जाए, तो वह देश-समाज के लिए आत्मघाती बन जाती है। 70-80 साल पहले तक प्रसिद्ध कलाकारों को सामान्य वेतन मिलता था। 30-40 साल पहले तक क्रिकेटरों की आय भी खास नहीं थी। राजनीति भी इतनी धनवान नहीं थी। ग्लैमर के पीछे का सच : बॉलीवुड में ड्रग्स और देह व्यापार, क्रिकेट में मैच फिक्सिंग और ऑनलाइन जुआ, राजनीति में गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार— इन सबके पीछे मुख्य कारण पैसा ही है। और यह पैसा हम ही उन्हें पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे हम लुटते रहे, वे खुशी-खुशी लूटते रहे।50 साल पहले तक फिल्में इतनी फूहड़ नहीं थीं। खिलाड़ी और नेता इतने अहंकारी नहीं थे। आज ये ‘देवता’ बन बैठे हैं। अब जरूरत इन्हें सिर से उतारकर जमीन पर लाने की है। हो-ची-मिन्ह का सवाल जो आज भी जिंदा हैं: एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति हो-ची-मिन्ह भारत आए। उन्होंने मंत्रियों से पूछा, “आपका व्यवसाय क्या है?” मंत्री बोले, “राजनीति ही हमारा व्यवसाय है।” हो-ची-मिन्ह हैरान हुए: “राजनीति तो मैं भी करता हूँ, लेकिन मेरा व्यवसाय खेती है। मैं किसान हूँ। सुबह-शाम खेती करता हूँ, दिन में राष्ट्रपति का काम।” भारतीय प्रतिनिधिमंडल निरुत्तर था।आज भारत में करोड़ों लोगों का जीवन-निर्वाह सिर्फ राजनीति पर टिका है। यह सेवा नहीं, व्यवसाय बन गया है। रोनाल्डो बचाए आपको: कोरोना में जब यूरोप संकट में था और डॉक्टर महीनों बिना छुट्टी काम कर रहे थे, तब पुर्तगाल के एक डॉक्टर ने गुस्से में कहा था: “आप रोनाल्डो के पास जाइए। आप उसे करोड़ों डॉलर देते हैं, वही बचाए। हमें मामूली फीस देकर इतनी उम्मीद क्यों?” आदर्श कौन हो ?जिस देश के युवाओं के आदर्श वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद न होकर राजनेता, क्रिकेटर और अभिनेता हों, वहां व्यक्तिगत तरक्की तो हो सकती है, पर समग्र प्रगति असंभव है। सामाजिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक रूप से वह देश पीछे रहेगा।जिस देश में अप्रासंगिक क्षेत्रों का वर्चस्व बढ़ेगा, वह कमजोर होता जाएगा। भ्रष्ट बढ़ेंगे, ईमानदार उपेक्षित होंगे। सवाल आपसे: योगदान क्या है ? सलमान खान, आमिर खान, शाहरुख खान, करीना कपूर या विराट कोहली— देश के विकास में इनका योगदान क्या है? हमारे बच्चे इन्हें आदर्श मानते हैं।भारत के भविष्य को विदूषकों की नहीं, डॉक्टरों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं की जरूरत है। जरूरत है प्रतिभाशाली, ईमानदार, देशभक्त लोगों को आदर्श बनाने की। नाचने-गाने वालों, चरित्रहीन, गुंडों, जातिवादियों का सामाजिक बहिष्कार करने की।अगर ऐसा करेंगे तो ठीक, वरना पतन निश्चित है। भारत का भविष्य आंखें खोले, जागे।(श्रोत-अज्ञात)