क्या है रोवर तकनीकी? जिससे अब होगी भूमि की पैमाइश

गाजीपुर, 30 जून 2026 – जनपद में अब भूमि विवादों को खत्म करने के लिए पैमाइश की पुरानी पद्धति बदलने जा रही है। 1 जुलाई 2026 से जिले की सभी तहसीलों में जरीब-फीते की जगह आधुनिक रोवर टेक्नोलॉजी से खेतों की पैमाइश होगी। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रेसवार्ता कर यह जानकारी दी।डीएम ने बताया कि अभी तक धारा-24 के तहत भूमि की पैमाइश जरीब, फीता, चुंबकीय सुई, मापक छड़ें और लट्ठा से होती थी। इससे पैमाइश में विलंब होता था और गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी। अब प्रदेश सरकार की नई पहल के तहत ग्लोबल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रोवर का उपयोग होगा। यह उपकरण भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के सैटेलाइट सिस्टम पर काम करता है। इससे पैमाइश बिल्कुल सटीक होगी।जिलाधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर 1 जुलाई से रोवर टेक्नोलॉजी से पैमाइश शुरू की जा रही है। इसके लिए जनपद की सभी तहसीलों को एक-एक रोवर उपलब्ध करा दिया गया है। रेवेन्यू अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। 1 जुलाई को हर तहसील के एक-एक खेत की रोवर से पैमाइश कराई जाएगी। साथ ही पुरानी विधि से भी नाप कर दोनों का मिलान किया जाएगा, ताकि नई तकनीक की सटीकता का आंकलन हो सके।डीएम अनुपम शुक्ला ने कहा कि रोवर टेक्नोलॉजी अपनाने का मुख्य उद्देश्य भूमि पैमाइश को तीव्र, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी बनाना है। इससे भूमि संबंधी विवादों का समय से और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो सकेगा। उ०प्र० राजस्व संहिता 2006 की धारा-24 और नियमावली 2016 के नियम-22 के तहत GNSS रोवर से सीमांकन का कार्य किया जाएगा।उन्होंने कहा कि पारंपरिक उपकरणों से सर्वे में देरी और त्रुटि की संभावना रहती थी। रोवर एक आधुनिक उपकरण है जो सीधे सैटेलाइट से जुड़कर जमीन की सटीक माप करता है। इससे पैमाइश व्यवस्था सुदृढ़ और मजबूत होगी।








