पूर्वांचल

डीआईजी वैभव कृष्ण की पहल पर खाकी बनी सपनों की सारथी, बुजुर्ग महिलाएं बोली पुलिस वाले तो बेटे जैसे

वाराणसी/चंदौली – मुख्यधारा से कटे चंदौली के जंगली इलाके पंडी गांव की बुजुर्ग महिलाओं के लिए सोमवार का दिन जिंदगी का सबसे यादगार दिन बन गया। जिन महिलाओं ने कभी अपने गांव की सीमा भी नहीं लांघी थी, उन्होंने वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण की संवेदनशील पहल पर पहली बार काशी नगरी देखी और बाबा विश्वनाथ के दरबार में मत्था टेका।यह पूरा वाकया 15 जून से जुड़ा है। डीआईजी वैभव कृष्ण चंदौली के दूरस्थ गांव पंडी के दौरे पर पहुंचे थे। ग्रामीण महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने सहज ही पूछ लिया कि “कभी शहर गई हैं?” जवाब में महिलाओं ने भोलेपन से कहा- “साहब, हमने तो आज तक अपना गांव भी नहीं छोड़ा। बनारस कैसा होता है, देखा ही नहीं।” बुजुर्ग महिलाओं की यह बात सुनकर डीआईजी भावुक हो गए।डीआईजी ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन महिलाओं की काशी यात्रा की व्यवस्था की जाए। वादे के मुताबिक 29 जून को पुलिस की विशेष बस पंडी गांव पहुंची। गांव की 30 बुजुर्ग महिलाओं और 10 पुरुषों को लेकर बस काशी रवाना हुई। पुलिस ने न सिर्फ यात्रा बल्कि भोजन और अन्य सभी व्यवस्थाएं भी खुद कराईं।काशी पहुंचकर सभी ने सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के दर्शन किए। इसके बाद संकट मोचन मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। सालों का सपना पूरा होने पर बुजुर्ग महिलाओं की आंखें खुशी से भर आईं। किसी ने कहा “बाबा को देखकर जनम सफल हो गया” तो कोई बोली “पुलिस वाले बेटे जैसे निकले।” यह पूरी पहल मिशन शक्ति अभियान के तहत की गई। इसका मकसद दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सामाजिक-सांस्कृतिक अनुभवों से रूबरू कराना है। डीआईजी वैभव कृष्ण की इस मानवीय पहल की पूरे इलाके में सराहना हो रही है। पहली बार काशी दर्शन कर लौट रही महिलाओं के चेहरों की चमक और खुशी इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।यूपी पुलिस की यह छवि बताती है कि खाकी सिर्फ कानून की रखवाली ही नहीं करती, बल्कि जरूरतमंदों के सपनों की साथी भी बनती है।