दारु की दुकानों के बाहर खुलेआम जाम छलकते शौकीन, आबकारी – पुलिस महकमा मौन

गाजीपुर – जिले में शराब बिक्री को लेकर बने नियम-कायदे सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गए हैं। कंपोजिट, देसी या अंग्रेजी शराब की दुकान—हर जगह हाल एक जैसा है। दुकानों के बाहर सार्वजनिक रास्तों पर खुलेआम शराब पीने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। गुमटी के पीछे, सड़क किनारे, झोपड़ी में या दुकान के ठीक सामने ही जाम छलकाए जा रहे हैं, लेकिन आबकारी विभाग और पुलिस विभाग दोनों ही आंख मूंदे बैठे हैं। क्या कहता है नियम:आबकारी नियमावली साफ कहती है कि वियर वार ,माडल शाप, और देशी दारू के दुकानदार अपने यहां पर परिसर में बैठकर शराब पीने की व्यवस्था दे सकते हैं लेकिन कम्पोजिट दारू की दुकान यह यह व्यवस्था नहीं दे सकतीं हैं।कम्पोजिट दारू की दुकान से खरीदारी के बाद उसे किसी सुरक्षित, निजी स्थान पर ही ले जाकर पीया जा सकता है। सार्वजनिक स्थान, सड़क, पार्क या दुकान के आसपास शराब पीना दंडनीय अपराध है। बैठकर पिलाने की व्यवस्था यानी ‘बार’ चलाने का लाइसेंस सिर्फ मॉडल शॉप को दिया जाता है। देसी, अंग्रेजी या कंपोजिट दुकानों को ऑन-साइट पिलाने की अनुमति नहीं है। ग्राउंड पर हालात उलट:हकीकत में गाजीपुर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हर शराब दुकान के बाहर नजारा एक जैसा है। शाम ढलते ही दुकान के बाहर भीड़ जुटने लगती है। कोई बाइक पर बैठकर, कोई गुमटी की आड़ में तो कोई झोपड़ी में प्लास्टिक के गिलास लेकर महफिल जमा लेता है। जमानिया, गहमर, सैदपुर, जखनियां, भांवरकोल से लेकर जिला मुख्यालय तक यही तस्वीर है। कई जगह दुकानदार खुद ग्राहकों को बैठने के लिए तख्त, कुर्सी या डिस्पोजल की व्यवस्था कर देते हैं—वो भी बिना किसी अनुमति के। राहगीर -महिलाएं परेशान,बढ़ रहा अपराध का खतरा:सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम शराब पीने से राहगीरों, खासकर महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कत होती है। शाम के वक्त कई रास्तों से निकलना मुश्किल हो जाता है। अक्सर नशे में धुत लोगों के बीच गाली-गलौज, मारपीट की नौबत आ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे छेड़खानी और छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। सब जानते हैं,पर कार्यवाही नही: स्थानीय निवासी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, “पुलिस की गाड़ी दिन में कई बार दुकान के सामने से गुजरती है। आबकारी इंस्पेक्टर भी निरीक्षण पर आते हैं। सबको पता है कि यहां खुलेआम शराब पी जा रही है, लेकिन कोई रोकता-टोकता नहीं।” आरोप है कि दुकानदारों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच सांठगांठ के चलते यह खेल खुलेआम चल रहा है। विभाग की जिम्मेदारी,पर निभा कौन रहा:सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने वालों पर आबकारी एक्ट और पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। आबकारी विभाग की उड़नदस्ता टीम और बीट पुलिस की जिम्मेदारी है कि ऐसी जगहों पर छापेमारी कर चालान करें। लेकिन जिले में ऐसी कार्रवाई न के बराबर होती है। सवाल उठता है कि जब नियम साफ है, उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं?जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को इस ओर सख्त रुख अपनाना होगा। दुकानों के बाहर सीसीटीवी से निगरानी, नियमित छापेमारी और बिना लाइसेंस पिलाने वाले दुकानदारों का लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई ही नियमों को जमीन पर उतार सकती है। वरना ‘सुरक्षित स्थान पर पियो’ का नियम सिर्फ बोर्ड तक ही सिमटा रहेगा।








